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भारतीय संविधान का निर्माण(making of Indian constitution)

भारतीय संविधान का निर्माण making of indian constitution

प्रस्तावना: एक नए युग की शुरुआत

क्या आपने कभी सोचा है की 140 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाला हमारा देश जिसमे हिन्दू,मुस्लिम शिख ईसाई आदि सभी एक समान और सभी को समान अधिकार कैसे मिला हुआ है ? इसका सीधा सा जवाब है – हमारा संविधान | भारतीय संविधान का निर्माण कोई रातों रात हुआ चमत्कार नहीं था | यह कई वर्षों के संघर्ष ,दूरदर्शिता और देश के महान विचारको की कड़ी मेहनत का नतीजा था | जब हमारा देश आजाद हो रहा था तो सबसे बड़ी चुनौती यही थी की हम इतने बड़े विशाल देश को कैसे चलाएंगे ? इस लेख मे हम उसी दिलचस्पी और एतिहासिक यात्रा पर निकलेंगे और जानेंगे की कैसे दुनिया का साबसे बड़ा लिखित संविधान अस्तित्व मे आया | तो चलिए , इतिहास के पन्नों को पलटते है |

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सविधान सभा का गठन कैसे हुआ ?

 आपको लगता होगा की संविधान लिखने का विचार सबसे पहले डॉ भीमराव अंबेडकर को आया था लेकिन यह पूर्णतः सच नहीं है संविधान लिखने का विचार सबसे पहले 1934 मे एम एन रॉय (M. N. Roy) ने रखा था | इसके बाद 1935 मे भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस ने आधिकारिक तौर पर संविधान सभा की मांग की | लेकिन असल बात तब बनी जब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंग्रेज भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए |

कैबिनेट मिशन का प्रभाव 

1946 मे ब्रिटिश सरकार ने भारत मे कैबिनेट मिशन भेजा | इसी मिशन की सिफारिशों के आधार पर नवंबर 1946 मे ‘ संविधान सभा ‘(Constituent Assembly ) का गठन हुआ | यह कोई आम सभा नहीं थी ; इसमे उस समय के भारत के सबसे प्रबुद्ध दिमाग शामिल थे | शुरुआत मे इसमे 389 सदस्य तय किए गए थे (292 ब्रिटिश प्रांतों , 93 देसी रियासतों से और 4 चीफ कमिश्नर क्षेत्रों से ) | लेकिन विभाजन के बाद यह संख्या घटकर 299 रह गई | दिलचस्प बात यह है की इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने गए थे , बल्कि प्रांतीय विधानसभाओ द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे |

संविधान सभा की प्रमुख बैठकें और कार्यप्रणाली

भारतीय संविधान का निर्माण

काम शुरू करने का समय आ गया था | हर नियम , हर एक अधिकार पर गहन चर्चा होनी थी |

पहली बैठक और शुरुआत 

संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को नई दिल्ली मे हुई | उस दिन 211 सदस्यों ने हिस्सा लिया | फ़्रांस के तर्ज पर , सभा के सबसे वरिष्ठ डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया | इसके ठीक दो दिन बाद 11 दिसम्बर  को , डॉ राजेन्द्र प्रसाद को स्थाई अध्यक्ष और एच सी मुखर्जी को उपाध्यक्ष चुना गया | सर बी एन राव को संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया , जिनका योगदान पर्दे के पीछे से बहुत अहम रहा |

ऐतिहासिक उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution)

13 दिसम्बर 1946 का दिन बहुत खास था | पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सभा मे उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया | यह एक  तरह से हमारे संविधान का ब्लूप्रिंट था | इसने बताया की हमारा देश एक स्वतंत्र , संप्रभु गणराज्य होगा , जहां न्याय , स्वतंत्रता और समानता होगी | यही प्रस्ताव बाद मे हमारे संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार बना |

प्रारूप समिति और डॉ. बी.आर. अंबेडकर का अतुलनीय योगदान

भारतीय संविधान का निर्माण

संविधान सभा ने अलग-अलग कामो के लिए कई समितियां बनाई , लेकिन सबसे महत्वपूर्ण थी प्ररूपी समिति (Drafting Committee) | इसका गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ था | इसका काम था संविधान का ड्राफ्ट (मसौदा ) तैयार करना | इस समिति के अध्यक्ष थे डॉ बी आर अंबेडकर |

डॉ अंबेडकर के अलावा इस 7 सदस्यीय समिति मे एन गोपालसवामी आयंगर , अल्लादी कृषणस्वामी अय्यर , डॉ के एम मुंशी , सैयद मोहम्मद सादुल्लाह,एन माधव राव (बी एल मित्तर की जगह ) और टी टी कृष्णमचारी (डी पी  खेतान की मृत्यु के बाद ) शामिल थे |

विभिन्न देशों के संविधानों का प्रभाव (उधार का थैला या समझदारी)

क्या आपको पता है की हमारे संविधान निर्माताओं ने लगभग 60 देशों के संविधान का अध्ययन किया था ? आलोचक अक्सर इसे उधार का थैला कहते है , लेकिन यह सच नहीं है डॉ अंबेडकर ने बड़ी शान से कहा था की हमने दुनिया भर के संविधान से जो भी अच्छा है , उसे लिया है , लेकिन भारत की परिस्थितियों के अनुसार उसे ढाला है |

ब्रिटेन संसदीय शासन प्रणाली , एकल नागरिकता |
अमेरिका मौलिक अधिकार (Fundamental Rights ),न्यायपालिका की स्वतंत्रता 
आयरलैंड राज्य के नीति निवेशक तत्व 
कनाडा मजबूत केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था |

सबसे ज्यादा प्रभाव ‘भारत सरकार अधिनियम 1935 ‘ का रहा , जिससे लगभग 250 अनुच्छेद सीधे या थोड़े बदलाव के साथ लिए गए |

संविधान के वाचन और महत्वपूर्ण संशोधन 

क्या आपको लगता है कि ड्राफ्ट बनते ही उसे पास कर दिया गया ? बिल्कुल नहीं ! जब पहला ड्राफ्ट प्रकाशित हुआ , तो जनता , प्रेस और प्रांतीय विधसभाओं को इस पर चर्चा करने के लिए 8 महीने का समय दिया गया | इसके बाद सभा मे इस पर तीन बार विस्तार से  चर्चा हुई | आपको  यकीन नहीं करोगे , इस दौरान 7,633 संशोधन (Amendments ) प्रस्तावित किए गए थे , जिनमे से 2,473 पर वास्तविक रूप से चर्चा की गई | यह दिखाता है की हमारे संविधान का हर एक शब्द कितनी बहस और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से गुजरा है |

26 नवंबर 1949: अंगीकरण का ऐतिहासिक दिन

अंततः वह दिन आ ही गया | 2 वर्ष , 11 महीने और 18 दिन की कड़ी मेहनत के बाद , 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने हमारे संविधान को पारित कर दिया | इसी दिन आज ‘संविधान दिवस ‘ मनाते है | उस समय के मूल संविधान मे 395 अनुच्छेद , 22 भाग और 8 अनुसूचियां थी | उसी दिन नागरिकता और चुनाव जैसे कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान तुरंत लागू कर दिए गए थे |

26 जनवरी 1950: पूर्ण रूप से लागू होना और गणतंत्र दिवस

संविधान बनकर तैयार था , लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 के दिन को चुना गया | क्यों ? क्योंकि इतिहास मे इस दिन की एक खास जगह थी | 1930 मे इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस ने लाहौर अधिवेशन (1929) के बाद पहली बार “पूर्ण स्वराज “ दिवस मनाया था | इसी एतिहासिक याद को ताज़ा रखने के लिए हमने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप मे चुना | इसी दिन संविधान सभा भंग हो गई और  1952 के आम चुनावों तक इसने अंतरिम संसद के रूप मे कम किया |

भारतीय संविधान का निर्माण

भारतीय संविधान की कुछ प्रमुख विशेषताएं

हमारा संविधान सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि; यह एक जीवंत दस्तावेज है | इसकी कुछ ऐसी  विशेषताएं है जो इसे दुनिया मे सबसे अलग बनती है:

  • दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान : भारत का संविधान आकार मे सबसे बड़ा है | इसमे हर चीज को बहुत विस्तार से समझाया गया है ताकि भविष्य मे कोई भ्रम न रहे |
  • लचीलेपन और कठोरता का बेहतरीन मिश्रण : कुछ नियमों को आसानी से बदला जा सकता है (जैसे राज्यों का नाम बदलना ), जबकि कुछ बुनियादी ढांचे (Basic Structure )को बदलना बहुत मुश्किल है |
  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार : बिना किसी भेदभाव के 18 वर्ष (मूल रूप से 21 वर्ष ) से ऊपर के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार , जो उस समय के हिसाब से एक बहुत बड़ा और साहसिक कदम था |

संविधान निर्माण से जुड़े कुछ बेहद रोचक तथ्य

आइए , कुछ ऐसे तथ्यों पर नजर डालते है जो शायद आपको न पता हो :

  • संविधान सभा का प्रतीक (मोहर ) एक हाथी  था , जो भारत के विशाल आकार को दर्शाता था |
  • मूल संविधान को टाइप या प्रिन्ट नहीं किया गया था ; इसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से इटैलिक स्टाइल मे बहुत ही खूबसूरती से लिखा था |
  • संविधान के हर पन्ने को सजाने का कम शांतिनिकेतन के कलाकारों ने किया था , जिनमे नंदलाल बोस और राममनोहर सिन्हा प्रमुख थे |
  • संविधान बनाने मे उस समय लगभग 64 लाख रुपये का खर्च आया था |

निष्कर्ष : हमारे लोकतंत्र की धड़कन 

तो दोस्तों यही थी हमारे संविधान के निर्माण की कहानी |भारतीय संविधान का निर्माण केवल कानूनी पन्नों को एक साथ जोड़ने की प्रक्रिया नहीं थी , बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के सपनों , आशाओं और स्वतंत्रता के लिए किए गये बलिदानों को एक दस्तावेज मे पिराने का महायज्ञ था |

 डॉ अंबेडकर ने एक बार चेतावनी दी थी की “ संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो , अगर इसे लागू करने वाले बुरे लोग है तो यह बुरा साबित होगा |”

 आज के नागरिक के रूप मे यह हमारी जिम्मेदारी है की हम इस पवित्र ग्रंथों के आदर्शों – न्याय , स्वतंत्रता , समानता और बंधुत्व  को अपने जीवन मे उतारे  और भारत के लोकतंत्र को हमेशा जीवंत बनाए रखे |

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

डॉ. बी.आर. अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक कहा जाता है। वे प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और संविधान के निर्माण में उनका तार्किक और कानूनी योगदान सबसे अहम था।

संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन (26 नवंबर 1949) संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अपनाया (Adopt) था।

मूल संविधान को प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से इटैलिक कैलिग्राफी (सुलेख) में लिखा था। इसके लिए उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया था, बस हर पन्ने पर अपना नाम लिखने की शर्त रखी थी।

26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज्य’ का संकल्प लेते हुए पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया था। इस ऐतिहासिक दिन के महत्व को कायम रखने के लिए संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।











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